Khamis, 5 Mac 2015

चंडीगढ़ यू. टी. को पंजाब और हरियाणा से आएं ऑफिसर्स ने कही का भी नहीं छोड़ा। आज पता चला है के यह तो ना ही सेंटर के साथ है, ना ही पंजाब के साथ है और ना ही हरियाणा के साथ है। आज सीखो के महान नौवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी गुरुपुरभ था। श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हिन्दू और सीखो के लिए आज के दिन दिल्ही में अपने सर का बलिदान देकर रक्षा की थी। जब ओरंगजेब ज़बरन हिन्दू और सीखो को मुसलमान बना रहा था, तब इन के धरम की रक्षा के लिए गुरु जी का सर धड़ से अलग कर दिया गया था। इस शहादत को दिल्ही, पंजाब और हरियाणा ने तो समझ लिया परन्तु चंडीगढ़ यू. टी. के घमंडी  ऑफिसर्स शायद सता के नशे में यह भूल चुके है। आज तो पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर चंडीगढ़ यू. टी. में आए टीचर्स को भी रोना गया के हम यहाँ पर गलत बैठे है। सेंटर को चंडीगढ़ यू. टी. के लिए अपना रुख साफ़ करना चाहिए के यह किस के साथ है। माफ़ करना हमे तो यह लगता है के चंडीगढ़ यू. टी एक कोठे पर नाचने वाली नचनिया है बाहर से ऑफिसर्स आते है खा-पी  कर चले जाते है। देश के प्रधान मंत्री जी को चाहिए के इन ऑफिसर्स को इस मत्रेयी वयूहार के लिए चंडीगढ़ यू. टी. के ऑफिसर्स पर कड़ी करवाई करनी चाहिए और यह के जीते होए सांसद को भी अपना रुख साफ़ करना चाहिए। 
 स्वर्ण सिंह कम्बोज,
आर. टी. आई. एक्टिविस्ट और प्रधान,
यू. टी. कैडर एजुकेशनल एम्प्लाइज यूनियन,
चंडीगढ़ यू. टी.

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